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ग्राहक को कम मात्रा में दवा खरीदना है तो वह उसे अब खरीद पाएंगे, उन्हें पूरा पैकेट खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा

ग्राहक को कम मात्रा में दवा खरीदना है तो वह उसे अब खरीद पाएंगे, उन्हें पूरा पैकेट खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा

ग्राहक को कम मात्रा में दवा खरीदना है तो वह उसे अब खरीद पाएंगे, उन्हें पूरा पैकेट खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा

सरकार जल्दी ही दवा (Medicine) क्षेत्र के लिए मरीजों और दवा विक्रेता के हित में एक अहम एडवाइजरी जारी कर सकती है। यदि ग्राहक को कम मात्रा में दवा खरीदना है तो वह उसे अब खरीद पाएंगे, उन्हें पूरा पैकेट खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।
साथ ही यह नियम दवा विक्रेताओं के लिए भी होगा। दरअसल ब्लिस्टर पैक से कुछ गोलियां देने से पैक के बाकी हिस्से में बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट न होने की समस्या पैदा हो जाती है।

क्या होगा बदलाव?

ऐसे में सरकार ने सलाह दी है कि मेडिसिन की पैकेजिंग को इस तरह से मोडिफाई किया जाए ताकि 2-4 टैबलेट को आसानी से अलग किया जा सके और हर टैबलेट के पीछे बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट की जानकारी हो। कहा जा रहा है कि इससे दवा की कीमत अधिक हो सकती है। लेकिन एक बार जब सभी कंपनियां ऐसा करना शुरू कर देंगी तो यह कम हो जाएंगी।

तीन टैबलेट की जरूरत है, तो पूरी स्ट्रिप क्यों खरीदे?

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स के एक अधिकारी ने ईटी को बताया, कि ‘अगर किसी को सिर्फ तीन टैबलेट की जरूरत है, तो वह पूरी स्ट्रिप क्यों खरीदे।’ डिपार्टमेंट ने पिछले हफ्ते एक मीटिंग में फार्मास्युटिकल सेक्टर के प्रतिनिधियों को इस बारे में बताया। अधिकारी ने पहले बताया कि इसके लिए एक एडवाइजरी जल्द ही जारी की जा सकती है।
कट स्ट्रिप्स से मेडिकल वालों को भी नुकसान

कट-स्ट्रिप्स खुदरा विक्रेताओं के लिए एक समस्या के रूप में उभरी है। उनके पास ज्यादातर बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती है। इन महत्वपूर्ण विवरणों के बिना दवाओं का स्टॉक करना अपराध है। जिससे इन कट-स्ट्रिप्स को फेंकना पड़ता है। जबकि एक्सपायर्ड दवाएं उचित निपटान के लिए थोक व्यापारी और फिर निर्माता के पास वापस चली जाती हैं।

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